What event when you joy a lot its very rare I know but one think I want to say joy is not depend on any kind of event….it just like a excuse to be happy because every second and every hour will be bring joy for you for this just you have to do little extra effort … you have power to make your time joy full tray to be honestly enjoy your every time of your life because happiness and sadness is part of life and wise man never be fill anything about this…..so always tray to enjoy and live your life honestly that after you will see life would be beautiful for you and not loose your hope also .
Saturday, November 5, 2011
Monday, January 3, 2011
Tuesday, December 28, 2010
व्यवहार
किसी ने मुझ से कहा था कि आदमी की व्यवहार किसी घड़ी के जैसे होता है कई लोग हाथों में घड़ी पहते है लेकिन हर घड़ी अलग अलग समय बतायेगी चाहे उसके समय दिखाने का अंतर कुछ मिनटों का हो या कुछ सेंकंड का लेकिन वो एक सा समय नहीं दिखाती फिर भी घड़ी पहनने वाले को लगता है कि वो सही समय देख रहा है उसी तरह अदमी का अपना व्यवहार भी होता है लोगो को लगता है वो जो कर रहा है वो सही है लेकिन क्या वो वास्तव में सही होता है क्योंकि उसकी नजर में वो सही कर रहा है लेकिन.....?
जैसे एक बार गांधी जी एक सभा में भाग लेने के लिए कोलकाता जा रहे थे वो कोलकाता जाने वाले ट्रेन पर बैठ गये और बर्थ में लेट गये उसी ट्रेन में एक गाधी जी का प्रशंसक भी चड़ा जो गांधी जी को देखने के लिए कोलकाता के सभा में जा रहे थे.चुंकि वो आदमी कभी गांधी जी को करीब से नहीं देखा था सो उसने ट्रेन के बर्थ में सोये गांधी जी को नहीं पहचाना और उसे बर्थ से उठा कर कहा की यहां बैठने के लिए जगह नहीं हो है और तूम सो कर जा रहे है उठ कर बैठे और हमें भी बैठने दो.गांधी जी उठ कर बैठ गये और वो मुशाफिर भी गांधी जी के बगल में बैठ गया.कोलकाता स्टेशन में भारी भीड गांधी जी के आने का इंतेजार कर रही थी जब ट्रेन स्टेशन में पहुंचा तो लोगो ने गांधी जी जिंदाबाद के नारे लगाने लगे और जब गांधी जी स्टेशन में उतरे तो लोगो ने उसे कंधे पर उठा लिय औऱ तब उसके साथ बैठे गांधी जी के दर्शन के इच्छुक व्यक्ती ने ये देखा तो उसे बड़ा आश्चर्य हुआ किया जिस व्यक्ती के दर्शन के लिए वो इतनी दूर आया वो तो उसके साथ ही यात्रा किया और उसने उसके साथ ट्रेने में ठीक व्यवहार नही किया ये सोचकर उसे बड़ा खराब लगा। लेकिन उसे ये बाते गांधी जी की भा गई की इतनी महान होने के बाद भी वो इतने सरल स्वभाव के थे,उसे इस बात पर भी आश्चर्य हुआ कि कोई आदमी इतना विनम्र कैसे हो सकता है ।
Saturday, November 27, 2010
Friday, October 22, 2010
Saturday, August 28, 2010
सोंचते रह जाओगे...
आसान से लगने वाले सवालों के जवाब कितने कठिन होते है इसका उदाहरण आप को आज बताने जा रहा हूं.दरसर एक क्विज कांटेस्ट देख रहा था इस क्विंज कांटेस्ट का ये फाइनल मुकाबला था जिसमें तीन प्रतिभागी इस फानल राउंड में पहुंचे थे.जज को इन तीनो प्रतियोगी से तीन तीन सवाल पूछना था तथा जिसका उत्तर सबसे अच्छा होता वो ये फाइनल का विजेता होता. स्टूडियों में इन प्रतियोंगी के मां बाप भीई बहन और सारे दोस्त भी मौजूद थे और ये सभी इस प्रोग्राम को लाइव देख रहे थे.इस सब से दुर ये तीनो एक बंद कमरे में बैठे थे जजों ने बारी बारी से इन सभी को बुला कर एक ही प्रकार के सावल पूछे गये।
आप जानना चाहेंगे ये तीनों सवाल क्या थे वो तीनो सवाल इस प्रकार थे :
1.अगर इस दुनिया का चप्पा चप्पा हर एक चीज आप की हो .तो आप अपने किसी प्रिय दोस्त को क्या दोगे और कितना दोगे.
2. अगर आप लड़की होते तो इस स्टूडियों में बैठे आपके दोस्तों में से आप किस दोस्त के साथ फिजिकल रिलेशन रखना पसंद करोंगो और क्यों।
3.तीसरा और अंतिम सवाल था कि आगर साक्षात भगवान आपके सामने आये और कहे कि आज आपके माता –पिता दोनो की मौत तय लेकिन तुम्हारे पुण्य प्रताप के चलते दोनो में से किसी एक की जान आज बच सकती है आपको बताना हि पडेगा कि दोनो मे से किस की जान बख्स दू और किसकी जान लूं और क्यों.
इन तीनो सवालों का उत्तर देना अनिवार्य था तथा प्रतियोगी पलट कर जजों से सवाल भी नहीं कर सकते थे.इन तीनो सवालों का बारी बारी से तीनो प्रतियोगी ने जवाब भी दिया तथा एक प्रतियोगी जीता भी था.
अब आप सोंच रहे होंगो कि इस सवाल का जवाब क्या होगा लेकिन इससे पहले आप जरा सोचिए कि क्या होगा इसका जवाब क्योंकि इसके जवाब के लिए थोड़ा इंतेजार करना पड़ेगा.
आप जानना चाहेंगे ये तीनों सवाल क्या थे वो तीनो सवाल इस प्रकार थे :
1.अगर इस दुनिया का चप्पा चप्पा हर एक चीज आप की हो .तो आप अपने किसी प्रिय दोस्त को क्या दोगे और कितना दोगे.
2. अगर आप लड़की होते तो इस स्टूडियों में बैठे आपके दोस्तों में से आप किस दोस्त के साथ फिजिकल रिलेशन रखना पसंद करोंगो और क्यों।
3.तीसरा और अंतिम सवाल था कि आगर साक्षात भगवान आपके सामने आये और कहे कि आज आपके माता –पिता दोनो की मौत तय लेकिन तुम्हारे पुण्य प्रताप के चलते दोनो में से किसी एक की जान आज बच सकती है आपको बताना हि पडेगा कि दोनो मे से किस की जान बख्स दू और किसकी जान लूं और क्यों.
इन तीनो सवालों का उत्तर देना अनिवार्य था तथा प्रतियोगी पलट कर जजों से सवाल भी नहीं कर सकते थे.इन तीनो सवालों का बारी बारी से तीनो प्रतियोगी ने जवाब भी दिया तथा एक प्रतियोगी जीता भी था.
अब आप सोंच रहे होंगो कि इस सवाल का जवाब क्या होगा लेकिन इससे पहले आप जरा सोचिए कि क्या होगा इसका जवाब क्योंकि इसके जवाब के लिए थोड़ा इंतेजार करना पड़ेगा.
Monday, August 23, 2010
अपना अपना वजूद...
कभी अपनो के बीच तो कभी अपने आस पास के लोगो को बीच अपनी वजूद का अपनी मौजूदगी का ऐहसास बहूत मुश्किल होता है. अपने आप को भीड़ से अलग करना.खास कर तब जब आप आपने लिए कुछ औऱ सोंच कर रखें हो और आप अपनी पहचान के लिए भटक रहें हो.जब आप को लगता है कि आप उन सामान्य लोगों में से नहीं हो.आप चाहते हो कि लोग आपको आपके नाम और काम से जाने आपकी अपनी एक छवी हो......लेकिन सवाल ये उठता है कैसे आप आपनी मौजूदगी का ऐहसास करायें कैसे अपने काम से अपनी टैलेंट से भीड़ से हटकर दिखे......
ये सवाल सुनने में जितना आसान है उतना ही करने में मुश्किल । इतना तो तय है कि अगर आप में टैलेंट है तो निश्चित तौर पर आप उन लोगों से अलग है लेकिन टैलेंट होना काफी नहीं होता.आपको भीड़ से अलग करने के लिए अपनी खुद की मार्केटिंग करनी भी आनी चाहिए.अपनी खुद की मार्केटिंग करना एक कला है जो सब में नहीं होता इसके लिए आपको आधूनिक चटूकारिता का अभ्यस्त होना होगा.आधुनिक चटूकारिता का मतलब आपको काम का पुरा श्रेय लेना से है औऱ उस श्रेय की सफलता को सहीं लोगो तक पहुंचा के तरिकों से हैं.ये जो आधूनिक चटूकारिता का काम है वो थोड़ा मुश्किल है क्योंकि मुझे लगता है टैलेंट तो अपने आप में पैदा भी किया जा सकते है लेकिन आधूनिक चटूकारिता तो जन्मजात गुण होता है जिसे आप अचनाक आपने आप में पैदा नहीं कर सकते....
कहते हैं कि किसी के होने ना होने से कोई फर्क नहीं पड़ता....लेकिन मेरा मानना है आपके होने ना होने का फर्क पड़ना चाहिए तभी आप अपना वजूद जिंदा रखा जा सकता है और अपनी वजूद को जिंदा रखने कि जद्दोजहद बहुत लंबी होती है ।
ये सवाल सुनने में जितना आसान है उतना ही करने में मुश्किल । इतना तो तय है कि अगर आप में टैलेंट है तो निश्चित तौर पर आप उन लोगों से अलग है लेकिन टैलेंट होना काफी नहीं होता.आपको भीड़ से अलग करने के लिए अपनी खुद की मार्केटिंग करनी भी आनी चाहिए.अपनी खुद की मार्केटिंग करना एक कला है जो सब में नहीं होता इसके लिए आपको आधूनिक चटूकारिता का अभ्यस्त होना होगा.आधुनिक चटूकारिता का मतलब आपको काम का पुरा श्रेय लेना से है औऱ उस श्रेय की सफलता को सहीं लोगो तक पहुंचा के तरिकों से हैं.ये जो आधूनिक चटूकारिता का काम है वो थोड़ा मुश्किल है क्योंकि मुझे लगता है टैलेंट तो अपने आप में पैदा भी किया जा सकते है लेकिन आधूनिक चटूकारिता तो जन्मजात गुण होता है जिसे आप अचनाक आपने आप में पैदा नहीं कर सकते....
कहते हैं कि किसी के होने ना होने से कोई फर्क नहीं पड़ता....लेकिन मेरा मानना है आपके होने ना होने का फर्क पड़ना चाहिए तभी आप अपना वजूद जिंदा रखा जा सकता है और अपनी वजूद को जिंदा रखने कि जद्दोजहद बहुत लंबी होती है ।
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